हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 10.10.23

कांड 10 → सूक्त 10 → मंत्र 23 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 10)

अथर्ववेद: | सूक्त: 10
सर्वे॒ गर्भा॑दवेपन्त॒ जाय॑मानादसू॒स्वः । स॒सूव॒ हि तामा॒हुर्व॒शेति॒ ब्रह्म॑भिः॒ क्लृप्तः स ह्यस्या॒ बन्धुः॑ ॥ (२३)
प्राणहीन उत्पन्न होने वाले गर्भ से सभी कांपने लगे. उस ने कहा कि हे वशा! तू बच्चे को जन्म दे. ब्राह्मणों ने उसी को वशा का बंधु निश्चित किया. (२३)
Everyone started trembling from the womb that was born lifeless. He said, "O Vasha! Give birth to a child. The Brahmins considered him as vasha's brother. (23)