हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 10.10.24

कांड 10 → सूक्त 10 → मंत्र 24 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 10)

अथर्ववेद: | सूक्त: 10
युध॒ एकः॒ सं सृ॑जति॒ यो अ॑स्या॒ एक॒ इद्व॒शी । तरां॑सि य॒ज्ञा अ॑भव॒न्तर॑सां॒ चक्षु॑रभवद्व॒शा ॥ (२४)
एक योद्धा इस के समीप आता है, जो एक मात्र एक गौ को वश में करने वाला है. यज्ञ ही पार करने वाले बने. वशा गौ ही पार करने वालों की आंख बनी. अर्थात्‌ वशा गौ के पीछे चल कर ही सब ने दुःख को पार किया. (२४)
A warrior comes close to this, who is going to subdue only one cow. The yajna became the one who crossed. Vasha became the eye of those who crossed the cow. That is, everyone crossed sorrow only by following Vasa Gau. (24)