हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 10.2.3

कांड 10 → सूक्त 2 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 10)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
चतु॑ष्टयं युज्यते॒ संहि॑तान्तं॒ जानु॑भ्यामू॒र्ध्वं शि॑थि॒रं कब॑न्धम् । श्रोणी॒ यदू॒रू क उ॒ तज्ज॑जान॒ याभ्यां॒ कुसि॑न्धं॒ सुदृ॑ढं ब॒भूव॑ ॥ (३)
घुटनों के ऊपर चारों भाग हैं-शिथिल, धड़, कंधे और जंघाएं. इन्हें किस ने बनाया, जिस से शरीर का भाग धड़ दृढ़ हुआ? (३)
There are four parts above the knees - lax, torso, shoulders and thighs. Who made them, so that the part of the body became torso strengthened? (3)