हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 10.3.11

कांड 10 → सूक्त 3 → मंत्र 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 10)

अथर्ववेद: | सूक्त: 3
अ॒यं मे॑ वर॒ण उर॑सि॒ राजा॑ दे॒वो वन॒स्पतिः॑ । स मे॒ शत्रू॒न्वि बा॑धता॒मिन्द्रो॒ दस्यू॑नि॒वासु॑रान् ॥ (११)
वरण वृक्ष से निर्मित यह दिव्य मणि मेरे सीने पर स्थित है. इंद्र ने जिस प्रकार असुरों का विनाश किया, उसी प्रकार यह मेरे शन्रुओं का विनाश करे. (११)
This divine gem made from the varan tree is located on my chest. Just as Indra destroyed the asuras, so it will destroy my shanrus. (11)