हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 10.3.12

कांड 10 → सूक्त 3 → मंत्र 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 10)

अथर्ववेद: | सूक्त: 3
इ॒मं बि॑भर्मि वर॒णमायु॑ष्माञ्छ॒तशा॑रदः । स मे॑ रा॒ष्ट्रं च॑ क्ष॒त्रं च॑ प॒शूनोज॑श्च मे दधत् ॥ (१२)
सौ की आयु प्राप्त करने का इच्छुक मैं इस मणि को धारण करता हूं. यह मणि मेरे राष्ट्र, बल, पशुओं एवं घोड़े की रक्षा करे. (१२)
I wear this gem, wishing to attain the age of hundred. May this gem protect my nation, force, animals and horse. (12)