अथर्ववेद (कांड 10)
यथा॒ सूर्यो॑ अति॒भाति॒ यथा॑स्मि॒न्तेज॒ आहि॑तम् । ए॒वा मे॑ वर॒णो म॒णिः की॒र्तिं भूतिं॒ नि य॑च्छतु । तेज॑सा मा॒ समु॑क्षतु॒ यश॑सा॒ सम॑नक्तु मा ॥ (१७)
जिस प्रकार यह सूर्य अत्यधिक प्रकाशित होता है और जिस प्रकार इस में तेज व्याप्त है, उसी प्रकार वरण वृक्ष से निर्मित मणि मुझे कीर्ति एवं ऐश्वर्य प्रदान करे. यह मणि मुझे तेजस्वी और यशस्वी बनाए. (१७)
Just as this sun is highly illuminated and just as it is bright, so may the gem made of the varan tree give me fame and opulence. This gem makes me stunning and successful. (17)