हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 10.4.18

कांड 10 → सूक्त 4 → मंत्र 18 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 10)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
इन्द्रो॑ जघान प्रथ॒मं ज॑नि॒तार॑महे॒ तव॑ । तेषा॑मु तृ॒ह्यमा॑णानां॒ कः स्वि॒त्तेषा॑मस॒द्रसः॑ ॥ (१८)
हे सर्प! इंद्र ने सब से पहले तेरे जन्म देने वालों को मारा था. उन सर्पो के विनाश के समय किस सर्प में विष शेष रहा? (१८)
O serpent! Indra first killed those who gave birth to you. Which snake had poison left at the time of destruction of those serpents? (18)