हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 10.4.20

कांड 10 → सूक्त 4 → मंत्र 20 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 10)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
अही॑नां॒ सर्वे॑षां वि॒षं परा॑ वहन्तु सिन्धवः । ह॒तास्तिर॑श्चिराजयो॒ निपि॑ष्टासः॒ पृदा॑कवः ॥ (२०)
सभी नदियां सपो के विष को अपने जल के साथ बहा ले जाएं. तिरश्चिराजी नामक सर्प नष्ट हो गए और पृदाकू नामक सर्प पीस डाले गए. (२०)
All rivers should take away the poison of sapo with their water. A snake named Tirshchiraji was destroyed and a snake named Pridaku was grinded. (20)