हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 10.5.22

कांड 10 → सूक्त 5 → मंत्र 22 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 10)

अथर्ववेद: | सूक्त: 5
यद॑र्वा॒चीनं॑ त्रैहाय॒णादनृ॑तं॒ किं चो॑दि॒म । आपो॑ मा॒ तस्मा॒त्सर्व॑स्माद्दुरि॒तात्पा॒न्त्वंह॑सः ॥ (२२)
हम ने तीन वर्षो में जो झूठ बोला है, वह नवीन दुर्गति लाने वाला है. जल मुझे इस समस्त पाप से बचाएं. (२२)
The lies we have told in three years are going to bring new misery. May water save me from all this sin. (22)