अथर्ववेद (कांड 10)
अराती॒योर्भ्रातृ॑व्यस्य दु॒र्हार्दो॑ द्विष॒तः शिरः॑ । अपि॑ वृश्चा॒म्योज॑सा ॥ (१)
बंधुओं में जो मेरा शत्रु, दुष्ट हृदय वाला और द्वेष करने वाला है, उस का शीश भी मैं वेग से तोड़ता हूं. (१)
I also break the head of the one who is my enemy, evil-hearted and hater among the brothers. (1)
अथर्ववेद (कांड 10)
वर्म॒ मह्य॑म॒यं म॒णिः फाला॑ज्जा॒तः क॑रिष्यति । पू॒र्णो म॒न्थेन॒ माग॑म॒द्रसे॑न स॒ह वर्च॑सा ॥ (२)
फाल से उत्पन्न यह मणि मेरे लिए कवच बन कर रक्षा करेगी. मंथन की सामर्थ्य एवं रस बल से युक्त होने के कारण समर्थ यह मणि मेरे पास आई है. (२)
This gem produced from fal will protect me by becoming a shield for me. Due to the power of churning and being equipped with juice power, this gem has come to me. (2)
अथर्ववेद (कांड 10)
यत्त्वा॑ शि॒क्वः प॒राव॑धी॒त्तक्षा॒ हस्ते॑न॒ वास्या॑ । आप॑स्त्वा॒ तस्मा॑ज्जीव॒लाः पु॒नन्तु॒ शुच॑यः॒ शुचि॑म् ॥ (३)
कुशल बढ़ई जो तुझे औजार सहित हाथ से मारता है अर्थात् छील कर तेरा निर्माण करता है, इसी कारण जीवन देने वाले एवं पवित्र जल तुझे शुद्ध करें और पवित्र बनाएं. (३)
The skilled carpenter who kills you with a tool, that is, peels you and creates you, that is why the life-giving and holy water purify you and make you holy. (3)
अथर्ववेद (कांड 10)
हिर॑ण्यस्रग॒यं म॒णिः श्र॒द्धां य॒ज्ञं महो॒ दध॑त् । गृ॒हे व॑सतु॒ नोऽति॑थिः ॥ (४)
सुवर्ण की माला से युक्त यह मणि श्रद्धा, यज्ञ एवं तेज को धारण करती हुई हमारे घर में अतिथि बन कर निवास करे. (४)
This gem with a garland of gold should be a guest in our house wearing reverence, sacrifice and glory. (4)
अथर्ववेद (कांड 10)
तस्मै॑ घृ॒तं सुरां॒ मध्वन्न॑मन्नं क्षदामहे । स नः॑ पि॒तेव॑ पु॒त्रेभ्यः॒ श्रेयः॑ श्रेयश्चिकित्सतु॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्वो॑ दे॒वेभ्यो॑ म॒णिरेत्य॑ ॥ (५)
हम इस अतिथि के लिए घृत, मदिरा, शहद और अन्न देते हैं. जिस प्रकार पिता पुत्र को परम कल्याण देता है, उसी प्रकार यह मणि मुझे कल्याण दे. यह मणि देवों के समीप से मेरे पास आ कर बारबार और प्रतिदिन मुझे सुख प्रदान करे. (५)
We give ghee, wine, honey and food for this guest. Just as the Father gives the Son the ultimate welfare, so may this gem give me welfare. May this gem come to me from near the gods and give me happiness again and again and every day. (5)
अथर्ववेद (कांड 10)
यमब॑ध्ना॒द्बृह॒स्पति॑र्म॒णिं फालं॑ घृत॒श्चुत॑मु॒ग्रं ख॑दि॒रमोज॑से । तम॒ग्निः प्रत्य॑मुञ्चत॒ सो अ॑स्मै दुह॒ आज्यं॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्व॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि ॥ (६)
यह मणि फाल से उत्पन्न, घृत टपकाने वाली, बल युक्त एवं खदिर अर्थात् खैर वृक्ष की लकड़ी से बनी है. बृहस्पति ने बल प्राप्ति के लिए इसे बांधा था. अग्नि ने यह मणि मुझे दी है. हे यजमान! यह मणि तुझे बारबार और प्रतिदिन बल प्रदान करे, जिस से तू प्रतिदिन एवं बारबार शत्रुओं का विनाश कर सके. (६)
This gem is made of fall, dripping, strong and made of khadir i.e. khair tree wood. Jupiter tied it to get strength. Agni has given me this gem. O host! May this gem give you strength again and again, so that you can destroy enemies every day and again. (6)
अथर्ववेद (कांड 10)
यमब॑ध्ना॒द्बृह॒स्पति॑र्म॒णिं फालं॑ घृत॒श्चुत॑मु॒ग्रं ख॑दि॒रमोज॑से । तमिन्द्रः॒ प्रत्य॑मुञ्च॒तौज॑से वी॒र्याय॒ कम् । सो अ॑स्मै॒ बल॒मिद्दु॑हे॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्व॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि ॥ (७)
यह मणि फाल से उत्पन्न, घृत टपकाने वाली, बल युक्त एवं खदिर अर्थात् खैर वृक्ष की लकड़ी से बनी है. बृहस्पति ने बल प्राप्ति के लिए इसे बांधा था. इंद्र ने बल, वीर्य और सुख प्रदान करने हेतु इस मणि को मुझे दिया है. हे यजमान! यह मणि बारबार और प्रतिदिन तुझे बल प्रदान करे. उस बल की सहायता से तू शत्रुओं का विनाश करे. (७)
This gem is made of fall, dripping, strong and made of khadir i.e. khair tree wood. Jupiter tied it to get strength. Indra has given me this gem to give strength, semen and happiness. O host! May this gem give you strength again and again and every day. With the help of that force, you destroy the enemies. (7)
अथर्ववेद (कांड 10)
यमब॑ध्ना॒द्बृह॒स्पति॑र्म॒णिं फालं॑ घृत॒श्चुत॑मु॒ग्रं ख॑दि॒रमोज॑से । तं सोमः॒ प्रत्य॑मुञ्चत म॒हे श्रोत्रा॑य॒ चक्ष॑से । सो अ॑स्मै॒ वर्च॒ इद्दु॑हे॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्व॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि ॥ (८)
बृहस्पति ने जिस फाल से उत्पन्न, घी टपकाने वाली, शक्तिशालिनी एवं खैर वृक्ष की लकड़ी से बनी मणि को बल प्राप्त करने के लिए बांधा था, उसे सोम ने महत्त्व, सुनने की शक्ति और उत्तम दृष्टि पाने के लिए मुझे प्रदान किया है. हे यजमान! यह मणि तुझे बारबार एवं प्रतिदिन तेज प्रदान करे, जिस की सहायता से तू अपने शत्रुओं का विनाश कर सके. (८)
The fall from which Jupiter had tied the gem produced, dripping ghee, shaktishalini and khair tree wood to get strength, soma has given me importance, hearing power and good vision. O host! May this gem give you glory again and again and day, with the help of which you can destroy your enemies. (8)