अथर्ववेद (कांड 10)
यमब॑ध्ना॒द्बृह॒स्पति॒र्वाता॑य म॒णिमा॒शवे॑ । तं राजा॒ वरु॑णो म॒णिं प्रत्य॑मुञ्चत शं॒भुव॑म् । सो अ॑स्मै स॒त्यमिद्दु॑हे॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्व॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि ॥ (१५)
जिस मणि को बृहस्पति देव ने वायु के समान वेग प्राप्त करने के लिए बांधा, उसी सुखदायी मणि को राजा वरुण ने हमें दिया है. वह मणि इस यजमान के लिए प्रतिदिन और बारबार सत्य प्रदान करे. हे यजमान! इस की सहायता से तुम अपने शत्रु का विनाश करो. (१५)
The gem that Jupiter god tied to get the same velocity as air, the same happy gem has been given to us by King Varuna. May that gem provide truth to this host every day and again. O host! With the help of this, you destroy your enemy. (15)