अथर्ववेद (कांड 10)
यमब॑ध्ना॒द्बृह॒स्पति॑र्दे॒वेभ्यो॒ असु॑रक्षितिम् । स मा॒यं म॒णिराग॑मत्स॒ह गोभि॑रजा॒विभि॒रन्ने॑न प्र॒जया॑ स॒ह ॥ (२३)
बृहस्पति ने असुरों का विनाश करने वाली जिस मणि को देवों के हाथों में बांधा था, वही मणि गायों, बकरियों, भेड़ों, अन्न एवं संतान के साथ मुझे प्राप्त हुई है. (२३)
I have received the same gem that Jupiter had tied in the hands of devas, which destroyed the asuras, with cows, goats, sheep, food and children. (23)