अथर्ववेद (कांड 10)
कस्मि॒न्नङ्गे॒ तपो॑ अ॒स्याधि॑ तिष्ठति॒ कस्मि॒न्नङ्ग॑ ऋ॒तम॒स्याध्याहि॑तम् । क्व व्र॒तं क्व श्र॒द्धास्य॑ तिष्ठति॒ कस्मि॒न्नङ्गे॑ स॒त्यम॑स्य॒ प्रति॑ष्ठितम् ॥ (१)
इस मनुष्य के किस अंग में तपस्या करने की शक्ति स्थित है? इस मनुष्य के किस अंग में सत्य भाषण की क्षमता स्थित है? इस मनुष्य के किस अंग में व्रत अर्थात् दृढ़ निश्चय और श्रद्धा, किस अंग में स्थित रहती है? इस मनुष्य के किस अंग में सत्य प्रतिष्ठित है? (१)
In which part of this human being is the power to do penance? In which part of this human being is the capacity for true speech located? In which part of this man is the fast, that is, determination and faith, located in which part? In which part of this man is truth established? (1)
अथर्ववेद (कांड 10)
कस्मा॒दङ्गा॑द्दीप्यते अ॒ग्निर॑स्य॒ कस्मा॒दङ्गा॑त्पवते मात॒रिश्वा॑ । कस्मा॒दङ्गा॒द्वि मि॑मी॒तेऽधि॑ च॒न्द्रमा॑ म॒ह स्क॒म्भस्य॒ मिमा॑नो॒ अङ्ग॑म् ॥ (२)
इस परमेश्वर के किस अंग से अग्नि दीप्त होती है? इस के किस अंग से वायु चलती है? चंद्रमा का निर्माण इस के किस अंग से हुआ है? वह चंद्रमा इस विश्वाधार से किस अंग को नापता है? (२)
From which part of this God does agni glow? From which part of this does the air move? The moon is formed from which part of it? Which part does that moon measure from this universe? (2)
अथर्ववेद (कांड 10)
कस्मि॒न्नङ्गे॑ तिष्ठति॒ भूमि॑रस्य॒ कस्मि॒न्नङ्गे॑ तिष्ठत्य॒न्तरि॑क्षम् । कस्मि॒न्नङ्गे॑ तिष्ठ॒त्याहि॑ता॒ द्यौः कस्मि॒न्नङ्गे॑ तिष्ठ॒त्युत्त॑रं दि॒वः ॥ (३)
इस परमात्मा के किस अंग में भूमि स्थित रहती है? इस के किस अंग में अंतरिक्ष होता है? यह दृढ़ द्यौ इस के किस अंग में स्थित है? ऊंचा स्वर्ग इस के किस अंग में स्थित है? (३)
In which part of this God is the land located? Which part of it contains space? In which part of this rigid dyau is it located? In which part of this high heaven is it located? (3)
अथर्ववेद (कांड 10)
क्व प्रेप्स॑न्दीप्यत ऊ॒र्ध्वो अ॒ग्निः क्व प्रेप्स॑न्पवते मात॒रिश्वा॑ । यत्र॒ प्रेप्स॑न्तीरभि॒यन्त्या॒वृतः॑ स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः ॥ (४)
ऊपर की ओर चलने वाली अग्नि, कहां जाने की इच्छा से प्रज्वलित होती है? वायु कहां जाने की इच्छा करती हुई चलती हैं? आवागमन के चक्कर में पड़े हुए प्राणी जहां जाने की इच्छा से गतिशील हैं, उस जगदाधार का वर्णन करो कि वह कौन है. (४)
The agni, moving upwards, ignites by the desire to go? Where does the air go? Where the creatures in the pursuit of movement are moving with the desire to go, describe who it is. (4)
अथर्ववेद (कांड 10)
क्वार्धमा॒साः क्व यन्ति॒ मासाः॑ संवत्स॒रेण॑ स॒ह सं॑विदा॒नाः । यत्र॒ यन्त्यृ॒तवो॒ यत्रा॑र्त॒वाः स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः ॥ (५)
संवत्सर के साथ मिलते हुए अर्धमास अर्थात् पक्ष एवं मास कहां चले जाते हैं? ये ऋतुएं और ऋतुओं से संबंधित पदार्थ कहां चले जाते हैं? उस परमात्मा के विषय में बताओ कि वह क्या है? (५)
Where do the ardhamas i.e. paksha and month go together with samvatsar? Where do these seasons and the substances related to the seasons go? Tell me about that God, what is He? (5)
अथर्ववेद (कांड 10)
क्व प्रेप्स॑न्ती युव॒ती विरू॑पे अहोरा॒त्रे द्र॑वतः संविदा॒ने । यत्र॒ प्रेप्स॑न्तीरभि॒यन्त्यापः॑ स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः ॥ (६)
परस्पर विरोधी रूप वाले युवा दिन और युवती रात कहां जाने की इच्छा से एकमत हो कर जाते हैं. जल जहां जाने की इच्छा से चले आ रहे हैं, उसी परमात्मा के विषय में बताओ कि वह कौन है? (६)
The young men with conflicting forms agree on where they want to go day and night. Tell us about the same God, where water is coming with the desire to go, who is He? (6)
अथर्ववेद (कांड 10)
यस्मि॑न्त्स्त॒ब्ध्वा प्र॒जाप॑तिर्लो॒कान्त्सर्वाँ॒ अधा॑रयत् । स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः ॥ (७)
जिस में स्थित रह कर प्रजापति समस्त लोकों को धारण करता है, उस परमात्मा के विषय में बताओ कि वह कौन है? (७)
Tell me about the God in whom Prajapati resides and holds all the worlds, who is He? (7)
अथर्ववेद (कांड 10)
यत्प॑र॒मम॑व॒मं यच्च॑ मध्य॒मं प्र॒जाप॑तिः ससृ॒जे वि॒श्वरू॑पम् । किय॑ता स्क॒म्भः प्र वि॑वेश॒ तत्र॒ यन्न प्रावि॑श॒त्किय॒त्तद्ब॑भूव ॥ (८)
प्रजापति ने उत्तम, अधम और मध्यम के रूप में संसार की सभी वस्तुओं और प्राणियों को बनाया है. इस संसार के कितने पदार्थ प्रजापति में प्रवेश कर चुके हैं? जो प्रवेश नहीं करता, वह कौन है? (८)
Prajapati has created all the things and creatures of the world as the best, the middle and the middle. How many substances of this world have entered Prajapati? Who is the one who does not enter? (8)