हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 10.8.23

कांड 10 → सूक्त 8 → मंत्र 23 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 10)

अथर्ववेद: | सूक्त: 8
स॑ना॒तन॑मेनमाहुरु॒ताद्य स्या॒त्पुन॑र्णवः । अ॑होरा॒त्रे प्र जा॑येते अ॒न्यो अ॒न्यस्य॑ रू॒पयोः॑ ॥ (२३)
इस सूर्य को सनातन कहा गया है. वह आज भी पुनः नवीन है. उसी परमात्मा से दिन और रात उत्पन्न होते हैं जो एकदूसरे से भिन्न रूप वाले हैं. (२३)
This Sun has been called Sanatan. He is still new again today. Day and night which are different from each other appeared from the same Paramatma. (23)