अथर्ववेद (कांड 10)
इ॒मामे॑षां पृथि॒वीं वस्त॒ एको॒ऽन्तरि॑क्षं॒ पर्येको॑ बभूव । दिव॑मेषां ददते॒ यो वि॑ध॒र्ता विश्वा॒ आशाः॒ प्रति॑ रक्ष॒न्त्येके॑ ॥ (३६)
इन में से एक इस पृथ्वी पर निवास करता है तथा अंतरिक्ष में व्याप्त रहता है, जो धारण करता है एवं इन जीवों को स्वर्ग प्रदान करता है. कुछ अर्थात् शेष देव ऐसे हैं जो सभी दिशाओं की रक्षा करते हैं. (३६)
One of them lives on this earth and occupies space, which bears and gives heaven to these creatures. There are some, i.e. the rest of the gods, who protect all directions. (36)