अथर्ववेद (कांड 10)
यस्ते॑ प्ला॒शिर्यो व॑नि॒ष्ठुर्यौ कु॒क्षी यच्च॒ चर्म॑ ते । आ॒मिक्षां॑ दुह्रतां दा॒त्रे क्षी॒रं स॒र्पिरथो॒ मधु॑ ॥ (१७)
हे शतौदना गौ! तेरी जो तिल्ली, गुदा, दोनों आंखें और तेरा चमङड़ा है, ये सब तेरे दानदाता को सदा दही, मीठा दूध और घी देते रहें. (१७)
O Shataudana Gau! May your spleen, anus, both eyes and your skin always give curd, sweet milk and ghee to your donor. (17)