हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 10.9.16

कांड 10 → सूक्त 9 → मंत्र 16 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 10)

अथर्ववेद: | सूक्त: 9
यत्ते॒ यकृ॒द्ये मत॑स्ने॒ यदा॒न्त्रं याश्च॑ ते॒ गुदाः॑ । आ॒मिक्षां॑ दुह्रतां दा॒त्रे क्षी॒रं स॒र्पिरथो॒ मधु॑ ॥ (१६)
हे शतौदना गौ! तेरा जिगर, तेरी आंतें तथा तेरी गुदा तेरे दानदाता को सदा दही, मीठा दूध और घी देते रहें. (१६)
O Shataudana Gau! May your liver, your intestines and your anus always give curd, sweet milk and ghee to your donor. (16)