अथर्ववेद (कांड 10)
यौ ते॑ बा॒हू ये दो॒षणी॒ यावंसौ॒ या च॑ ते क॒कुत् । आ॒मिक्षां॑ दुह्रतां दा॒त्रे क्षी॒रं स॒र्पिरथो॒ मधु॑ ॥ (१९)
हे शतौदना गौ! तेरी दोनों भुजाएं, दोनों पिंडलियां, दोनों कंधे और ठाट तेरे दानदाता को सदा दही, मीठा दूध और घी देते रहें. (१९)
O Shataudana Gau! May your two arms, both shins, both shoulders and thatt always give curd, sweet milk and ghee to your donor. (19)