अथर्ववेद (कांड 10)
यास्ते॑ ग्री॒वा ये स्क॒न्धा याः पृ॒ष्टीर्याश्च॒ पर्श॑वः । आ॒मिक्षां॑ दुह्रतां दा॒त्रे क्षी॒रं स॒र्पिरथो॒ मधु॑ ॥ (२०)
हे शतौदना गौ! तेरी जो गरदन, तेरे जो कंधे, जो पीठ और जो पसलियां हैं, वे तेरे दानदाता को सदा दही, मीठा दूध और घी देते रहें. (२०)
O Shataudana Gau! May your neck, your shoulders, your back and ribs always give curd, sweet milk and ghee to your donor. (20)