हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 11.1.17

कांड 11 → सूक्त 1 → मंत्र 17 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 11)

अथर्ववेद: | सूक्त: 1
शु॒द्धाः पू॒ता यो॒षितो॑ य॒ज्ञिया॑ इ॒मा आप॑श्च॒रुमव॑ सर्पन्तु शु॒भ्राः । अदुः॑ प्र॒जां ब॑हु॒लान्प॒शून्नः॑ प॒क्तौद॒नस्य॑ सु॒कृता॑मेतु लो॒कम् ॥ (१७)
शुद्ध और पवित्र स्त्रियां यज्ञ के योग्य इन श्वैत रंग के जलों को बटलोई में डालें. वे जल हमें पुत्र आदि रूप संतान और गाय, भैंस आदि पशु प्रदान करें. ब्रह्मौदन को पकाने वाला यजमान पुण्य करने वालों के लोक अर्थात्‌ स्वर्ग को जाए. (१७)
Pure and holy women put these white colored waters in batloi suitable for yajna. May those waters give us sons etc. children and animals like cows, buffaloes etc. The host who cooks Brahmaudan should go to the world of those who do virtue, that is, heaven. (17)