हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 11.10.6

कांड 11 → सूक्त 10 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 11)

अथर्ववेद: | सूक्त: 10
तप॑श्चै॒वास्तां॒ कर्म॑ चा॒न्तर्म॑ह॒त्यर्ण॒वे । तपो॑ ह जज्ञे॒ कर्म॑ण॒स्तत्ते ज्ये॒ष्ठमुपा॑सत ॥ (६)
प्रलय काल के महासागर में तप और कर्म ही थे. तप कर्म से उत्पन्न हुआ था. वे धाता आदि सृष्टि के कारण बने हुए ब्रह्म की उपासना कर रहे थे. (६)
There was penance and karma in the ocean of the holocaust period. Tapa was born out of karma. They were worshiping Brahman, who was created due to dhata etc. creation. (6)