अथर्ववेद (कांड 11)
मा नो॑ हिंसी॒रधि॑ नो ब्रूहि॒ परि॑ णो वृङ्ग्धि॒ मा क्रु॑धः । मा त्वया॒ सम॑रामहि ॥ (२०)
हे रुद्र! हमारी हिंसा मत करो. हमारे प्रति पक्षपात के वचन अधिक मात्रा में बोलो. हमें तुम अपने आयुध का लक्ष्य मत बनाओ एवं हमारे प्रति क्रोध मत करो. हम कभी भी तुम से न मिलें. (२०)
O Rudra! Don't do our violence. Speak more of the promises of partiality towards us. Don't make us the target of your armament and don't get angry with us. Let us never meet you. (20)