हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 11.7.16

कांड 11 → सूक्त 7 → मंत्र 16 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 11)

अथर्ववेद: | सूक्त: 7
आ॑चा॒र्यो ब्रह्मचा॒री ब्र॑ह्मचा॒री प्र॒जाप॑तिः । प्र॒जाप॑ति॒र्वि रा॑जति वि॒राडिन्द्रो॑ऽभवद्व॒शी ॥ (१६)
आचार्य पहले विद्या का उपदेश कर के ब्रह्मचारी के रूप में उत्पन्न हुआ. ब्रह्मचारी तप के द्वारा अधिक महिमा को प्राप्त कर के जगत्‌ स्रष्टा प्रजापति हुआ. प्रजापति विराट्‌ हुआ. बाद में वह स्वतंत्र इंद्र हुआ. (१६)
Acharya first originated as a brahmachari by preaching vidya. Jagat Srishta Prajapati became by attaining more glory through brahmachari penance. Prajapati virat happened. Later he became independent Indra. (16)