अथर्ववेद (कांड 11)
अ॒ग्निं ब्रू॑मो॒ वन॒स्पती॒नोष॑धीरु॒त वी॒रुधः॑ । इन्द्रं॒ बृह॒स्पतिं॒ सूर्यं॒ ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः ॥ (१)
हम अग्नि की, वनस्पतियों की, जड़ीबूटियों और फसलों की, वृक्षों की, इंद्र की, बृहस्पति की तथा सूर्य की स्तुति करते हैं. वे हमें सभी पापों से मुक्त करें. (१)
We praise agni, vegetation, herbs and crops, trees, Indra, Jupiter and sun. May they free us from all sins. (1)
अथर्ववेद (कांड 11)
ब्रू॒मो राजा॑नं॒ वरु॑णं मि॒त्रं विष्णु॒मथो॒ भग॑म् । अंशं॒ विव॑स्वन्तं ब्रूम॒स्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः ॥ (२)
हम तेजस्वी वरुण की, मित्र की, विष्णु की, भग की, अंश और विवस्वान अर्थात् सूर्य की स्तुति करते हैं. वे हमें पाप से मुक्त करें. (२)
We praise the bright Varuna, the friend, Vishnu, the Bhaga, ansh and vivasvan i.e. the sun. Let them free us from sin. (2)
अथर्ववेद (कांड 11)
ब्रू॒मो दे॒वं स॑वि॒तारं॑ धा॒तार॑मु॒त पू॒षण॑म् । त्वष्टा॑रमग्रि॒यं ब्रू॑म॒स्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः ॥ (३)
हम दानादि गुणों से युक्त सविता, धाता, पूषा, त्वष्टा और अग्नि की स्तुति करते हैं. वे हमें पाप से मुक्त करें. (३)
We praise Savita, Dhata, Pusha, Tvashta and Agni with danadi qualities. Let them free us from sin. (3)
अथर्ववेद (कांड 11)
ग॑न्धर्वाप्स॒रसो॑ ब्रूमो अ॒श्विना॒ ब्रह्म॑ण॒स्पति॑म् । अ॑र्य॒मा नाम॒ यो दे॒वस्ते॑ नो मुञ्च॒न्त्वंह॑सः ॥ (४)
हम प्रथम गिने जाने वाले गंधर्वो की, अप्सराओं की, अश्विनीकुमारों की, त्वष्टा की स्तुति करते हैं. वे हमें पाप से मुक्त करें. (४)
We praise the Gandharvas, the Apsaras, ashwinikumaras, tvashta, who are counted first. Let them free us from sin. (4)
अथर्ववेद (कांड 11)
अ॑होरा॒त्रे इ॒दं ब्रू॑मः सूर्याचन्द्र॒मसा॑वु॒भा । विश्वा॑नादि॒त्यान्ब्रू॑म॒स्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः ॥ (५)
हम दिनरात तथा सूर्य चंद्रमा दोनों की स्तुति करते हैं. हम सभी आदित्यों की स्तुति करते हैं. वे हमें पाप से मुक्त करें. (५)
We praise both day and night and the sun moon. We praise all Adityas. Let them free us from sin. (5)
अथर्ववेद (कांड 11)
वातं॑ ब्रूमः प॒र्जन्य॑म॒न्तरि॑क्ष॒मथो॒ दिशः॑ । आशा॑श्च॒ सर्वा॑ ब्रूम॒स्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः ॥ (६)
हम वायु की, मेघ की, आकाश की तथा दिशाओं की स्तुति करते हैं. हम सभी विदिशाओं अर्थात् दिशाओं के कोनों की स्तुति करते हैं. वे हमें पाप से मुक्त करें. (६)
We praise the wind, the cloud, the sky and the directions. We praise all vidishas i.e. corners of directions. Let them free us from sin. (6)
अथर्ववेद (कांड 11)
मु॒ञ्चन्तु॑ मा शप॒थ्यादहोरा॒त्रे अथो॑ उ॒षाः । सोमो॑ मा दे॒वो मु॑ञ्चतु॒ यमा॒हुश्च॒न्द्रमा॒ इति॑ ॥ (७)
दिन, रात और उषाएं शपथ से उत्पन्न पाप से हमारी रक्षा करें. वे सोम देव मुझे पाप से मुक्त करें, जिन्हें लोग चंद्रमा कहते हैं. (७)
May the day, night and the morning protect us from the sin caused by the oath. May those Som Devs free me from sin, whom people call the moon. (7)
अथर्ववेद (कांड 11)
पार्थि॑वा दि॒व्याः प॒शव॑ आर॒ण्या उ॒त ये मृ॒गाः । श॒कुन्ता॑न्प॒क्षिणो॑ ब्रूम॒स्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः ॥ (८)
हम पृथ्वी पर रहने वाले मनुष्यों, देवों, ग्रामीण पशुओं और सिंह आदि जंगली पशुओं की स्तुति करते हैं. हम शकुन बने हुए पक्षियों की स्तुति करते हैं. वे हमें पाप से मुक्त करें. (८)
We praise the humans, gods, rural animals and wild animals like lions living on earth. We praise the birds that remain shakun. Let them free us from sin. (8)