हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 12.1.16

कांड 12 → सूक्त 1 → मंत्र 16 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 12)

अथर्ववेद: | सूक्त: 1
ता नः॑ प्र॒जाः सं दु॑ह्रतां सम॒ग्रा वा॒चो मधु॑ पृथिवि धेहि॒ मह्य॑म् ॥ (१६)
हे पृथ्वी! सूर्य की किरणें हमारे हेतु प्रजा अर्थात्‌ संतान और सेवक वर्ग के अतिरिक्त सभी प्रकार की वाणी प्रदान करें. हे पृथ्वी! तुम मुझे मधुर पदार्थ प्रदान करो. (१६)
O Earth! May the rays of the sun provide us with all kinds of voice except for the people i.e. children and servants. O Earth! You give me sweet substances. (16)