अथर्ववेद (कांड 12)
अ॒ग्निवा॑साः पृथि॒व्यसित॒ज्ञूस्त्विषी॑मन्तं॒ संशि॑तं मा कृणोतु ॥ (२१)
जिस धूम में अग्नि का वास है, उस धूम को जानने वाली पृथ्वी मुझे तेजस्वी बनाए. (२१)
The earth that knows the smoke in which agni resides, make me bright. (21)
कांड 12 → सूक्त 1 → मंत्र 21 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation