हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 12.1.33

कांड 12 → सूक्त 1 → मंत्र 33 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 12)

अथर्ववेद: | सूक्त: 1
याव॑त्ते॒ऽभि वि॒पश्या॑मि॒ भूमे॒ सूर्ये॑ण मे॒दिना॑ । ताव॑न्मे॒ चक्षु॒र्मा मे॒ष्टोत्त॑रामुत्तरां॒ समा॑म् ॥ (३३)
मैं जब तक तुझे सूर्य के सामने देखता रहूं, तब तक मेरे देखने की शक्ति नष्ट न हो. (३३)
As long as I see you in front of the sun, my power of seeing will not be destroyed. (33)