अथर्ववेद (कांड 12)
यस्या॒मन्नं॑ व्रीहिय॒वौ यस्या॑ इ॒माः पञ्च॑ कृ॒ष्टयः॑ । भूम्यै॑ प॒र्जन्य॑पत्न्यै॒ नमो॑ऽस्तु व॒र्षमे॑दसे ॥ (४२)
जिस पृथ्वी पर गेहूं और जौ जैसे अन्न पैदा होते हैं, जिस पर पांच प्रकार की खेतियां होती हैं, वर्षा द्वारा पुष्ट की जाने वाली पृथ्वी को नमस्कार है. (४२)
Salutations to the earth on which grains like wheat and barley are produced, on which there are five types of fields, the earth that is strengthened by rain. (42)