अथर्ववेद (कांड 12)
यद्य॑त्कृ॒ष्णः श॑कु॒न एह ग॒त्वा त्सर॒न्विष॑क्तं॒ बिल॑ आस॒साद॑ । यद्वा॑ दा॒स्या॒र्द्रह॑स्ता सम॒ङ्क्त उ॒लूख॑लं॒ मुस॑लं शुम्भतापः ॥ (१३)
कोवे ने कपट कर के इस में बिल बनाया हो अथवा दासी ने भीगे हुए हाथ से मूसल और उलूखल का स्पर्श कर लिया हो, तब भी यह मंगलकारक हो. (१३)
Covey has fraudulently made a bill in it or the maid has touched the pestle and ulukhal with a wet hand, even then it is auspicious. (13)