अथर्ववेद (कांड 12)
अ॒ग्नीषो॑माभ्यां॒ कामा॑य मि॒त्राय॒ वरु॑णाय च । तेभ्यो॑ याचन्ति ब्राह्म॒णास्तेष्वा वृ॑श्च॒तेऽद॑दत् ॥ (२६)
ब्राह्मण सोम के लिए, अग्नि के लिए, काम के लिए और मित्रावरुण के लिए वशा को मांगते हैं. वशा न देने पर ये वशा के स्वामी को काटते हैं. (२६)
Brahmins ask for Vasha for Soma, for Agni, for work and for Mitravarun. If they do not give vasa, they cut the master of the vasha. (26)