हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 13.1.44

कांड 13 → सूक्त 1 → मंत्र 44 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 13)

अथर्ववेद: | सूक्त: 1
वेद॒ तत्ते॑ अमर्त्य॒ यत्त॑ आ॒क्रम॑णं दि॒वि । यत्ते॑ स॒धस्थं॑ पर॒मे व्योमन् ॥ (४४)
हे अविनाशी सूर्य! झुलोक में तुम्हारा स्थान है. तुम इस में गमन करते हो. मैं उस स्थान को जानता हूं. उपासकों सहित आकाश में तुम्हारा जो निवास स्थान है, उसे में भलीभांति जानता हूं. (४४)
O imperishable sun! You have a place in jhulok. You go into this. I know that place. I know very well your abode in the sky, including the worshippers. (44)