अथर्ववेद (कांड 13)
गी॒र्भिरू॒र्ध्वान्क॑ल्पयि॒त्वा रोहि॑तो॒ भूमि॑मब्रवीत् । त्वयी॒दं सर्वं॑ जायतां॒ यद्भू॒तं यच्च॑ भा॒व्यम् ॥ (५४)
रोहित ने पृथ्वी को स्तुतियों से उन्नत करते हुए उस से कहा कि भूत और भविष्य जो कुछ हों, वे तुम से ही उत्पन्न हों. (५४)
Rohita elevated the earth with praises and told him that whatever the past and future may be, they should arise from you. (54)