हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 13.2.39

कांड 13 → सूक्त 2 → मंत्र 39 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 13)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
रोहि॑तः का॒लो अ॑भव॒द्रोहि॒तोऽग्रे॑ प्र॒जाप॑तिः । रोहि॑तो य॒ज्ञानां॒ मुखं॒ रोहि॑तः॒ स्वराभ॑रत् ॥ (३९)
रोहित काल में ये प्रजापति थे. ये यज्ञों के मूल रूप हैं तथा ये ही रोहित अब स्वर्ग का पोषण करते हैं. (३९)
In the Rohit period, it was Prajapati. These are the basic forms of yajnas and these rohits now nurture heaven. (39)