हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 13.2.40

कांड 13 → सूक्त 2 → मंत्र 40 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 13)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
रोहि॑तो लो॒को अ॑भव॒द्रोहि॒तोऽत्य॑तप॒द्दिव॑म् । रोहि॑तो र॒श्मिभि॒र्भूमिं॑ समु॒द्रमनु॒ सं च॑रत् ॥ (४०)
स्वर्ग में रहने वाले रोहित अपनी रशिभमियों से सागर और पृथ्वी में विचरते हैं. ऐसे रोहित दर्शन करने योग्य हैं. (४०)
Rohit, who lives in heaven, wanders in the ocean and earth with his zodiac signs. Such Rohit is worthy of darshan. (40)