अथर्ववेद (कांड 13)
स प्र॒जाभ्यो॒ वि प॑श्यति॒ यच्च॑ प्रा॒णति॒ यच्च॒ न ॥ (११)
वे स्थावर और जंगम सभी प्रजाओं के द्रष्टा और सभी के साक्षी हैं. (११)
He is the seer of all the real and movable subjects and the witness of all. (11)
कांड 13 → सूक्त 4 → मंत्र 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation