अथर्ववेद (कांड 13)
तमि॒दं निग॑तं॒ सहः॒ स ए॒ष एक॑ एक॒वृदेक॑ ए॒व ॥ (१२)
यह सब उसी को प्राप्त होता है. वह अकेला ही एकवृत है. (१२)
All this is received by him. He is the only one. (12)
कांड 13 → सूक्त 4 → मंत्र 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation