हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 13.5.3

कांड 13 → सूक्त 5 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 13)

अथर्ववेद: | सूक्त: 5
न प॑ञ्च॒मो न ष॒ष्ठः स॑प्त॒मो नाप्यु॑च्यते । य ए॒तं दे॒वमे॑क॒वृतं॒ वेद॑ ॥ (३)
इन एकवृत अर्थात्‌ ब्रह्म का ज्ञाता पंचम, षष्ठ अथवा सप्तम नहीं कहलाता है. (३)
These ekvrit i.e. the knower of Brahman is not called fifth, sixth or seventh. (3)