हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 13.5.4

कांड 13 → सूक्त 5 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 13)

अथर्ववेद: | सूक्त: 5
नाष्ट॒मो न न॑व॒मो द॑श॒मो नाप्यु॑च्यते । य ए॒तं दे॒वमे॑क॒वृतं॒ वेद॑ ॥ (४)
जो इन एकवृत अर्थात्‌ ब्रह्म का ज्ञाता है वह अष्टम, नवम नहीं कहलाता है. (४)
The one who is the knower of these ekkerts i.e. Brahman is not called the eighth, ninth. (4)