हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 14.1.11

कांड 14 → सूक्त 1 → मंत्र 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 14)

अथर्ववेद: | सूक्त: 1
ऋक्सा॒माभ्या॑म॒भिहि॑तौ॒ गावौ॑ ते साम॒नावै॑ताम् । श्रोत्रे॑ ते च॒क्रे आ॑स्तांदि॒वि पन्था॑श्चराच॒रः ॥ (११)
ऋग्वेद और सामवेद से अभिमंत्रित तेरे दोनों बल शक्तिपूर्वक चलते हैं. दोनों कान तेरे रथ के दो पहिए हैं. द्युलोक में तेरा चर और अचर मार्ग है. (११)
Both your forces, invoked by rigveda and samaveda, move powerfully. Both ears are the two wheels of your chariot. In The World, you have a variable and a constant path. (11)