हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 14.1.16

कांड 14 → सूक्त 1 → मंत्र 16 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 14)

अथर्ववेद: | सूक्त: 1
द्वे ते॑ च॒क्रेसूर्ये॑ ब्र॒ह्माण॑ ऋतु॒था वि॑दुः । अथैकं॑ च॒क्रं यद्गुहा॒ तद॑द्धा॒तय॒इद्वि॒दुः ॥ (१६)
हे शुभ करने वाले अश्चिनीकुमारो! तुम दोनों जब वर के द्वारा पूछने योग्य सूर्य के समीप गए, तुम्हारे उसे कर्म को सभी देवों ने सराहा. पूषा ने तुम्हें उसी प्रकार स्वीकार किया जिस प्रकार पुत्र पिता को स्वीकार करता है. (१६)
O auspicious aschini kumaras! When both of you went near the sun worthy of asking for by the groom, your deeds were appreciated by all the gods. Pusha accepted you just as the son accepts the Father. (16)