हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 14.1.19

कांड 14 → सूक्त 1 → मंत्र 19 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 14)

अथर्ववेद: | सूक्त: 1
प्र त्वा॑मुञ्चामि॒ वरु॑णस्य॒ पाशा॒द्येन॒ त्वाब॑ध्नात्सवि॒ता सु॒शेवाः॑ । ऋ॒तस्य॒ योनौ॑सुकृ॒तस्य॑ लो॒के स्यो॒नं ते॑ अस्तु स॒हसं॑भलायै ॥ (१९)
मैं तुझे वरुण के उस शाप से मुक्त करता हूं, जिस से तुझे सेवा करने योग्य सविता ने बांधा था. सदाचारी और उत्तम कर्म करने वाले पति के घर में तुझे सुख प्राप्त हो. (१९)
I free you from the curse of Varuna, with which you were bound by a serviceable Savita. May you get happiness in the house of a virtuous and good deed husband. (19)