हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 14.1.4

कांड 14 → सूक्त 1 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 14)

अथर्ववेद: | सूक्त: 1
यत्त्वा॑ सोमप्र॒पिब॑न्ति॒ तत॒ आ प्या॑यसे॒ पुनः॑ । वा॒युः सोम॑स्य रक्षि॒ता समा॑नां॒ मास॒आकृ॑तिः ॥ (४)
हे सोम! पुरुष तुम्हें पीते हैं, फिर भी तुम वृद्धि को प्राप्त होते रहते हो. अनेक संवत्सरों रूप से वायु इस सोम की रक्षा करता है. (४)
O Mon! Men drink you, yet you continue to grow. Air protects this Som in many Samvatsars. (4)