अथर्ववेद (कांड 14)
जी॒वं रु॑दन्ति॒वि न॑यन्त्यध्व॒रं दी॒र्घामनु॒ प्रसि॑तिं दीध्यु॒र्नरः॑ । वा॒मं पि॒तृभ्यो॒ यइ॒दं स॑मीरि॒रे मयः॒ पति॑भ्यो ज॒नये॑ परि॒ष्वजे॑ ॥ (४६)
जीवित मनुष्य की विदाई पर लोग रोते हैं, यज्ञ को साथ ले जाते हैं तथा दीर्घ मार्ग का विचार करते हैं. वे लोग अपने मातापिता के लिए यह सुंदर कार्य करते हैं. वे पत्नी को सुख देने वाले हैं, जो स्त्री का आलिंगन करते हैं. (४६)
At the farewell of a living man, people cry, take the sacrifice along and think of a long way. They do this beautiful job for their parents. They are the ones who give happiness to the wife, who embraces the woman. (46)