अथर्ववेद (कांड 14)
बृह॒स्पतिः॑प्रथ॒मः सू॒र्यायाः॑ शी॒र्षे केशाँ॑ अकल्पयत् । तेने॒माम॑श्विना॒ नारीं॒ पत्ये॒सं शो॑भयामसि ॥ (५५)
हे अश्विनीकुमारो! बृहस्पति ने सूर्या के केशों का विन्यास किया था. उसी के अनुसार हम वरभाव आदि के द्वारा इस स्त्री को पति के निमित्त सजाते हैं. (५५)
O Ashwinikumaro! Jupiter had configured Surya's hair. Accordingly, we decorate this woman for the sake of husband through grooming etc. (55)