हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 14)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
तुभ्य॒मग्रे॒पर्य॑वहन्त्सू॒र्यां व॑ह॒तुना॑ स॒ह । स नः॒ पति॑भ्यो जा॒यां दा अ॑ग्ने प्र॒जया॑स॒ह ॥ (१)
हे अग्नि देव! हम उपहारों के साथ सूर्या को तुम्हारे निमित्त लाए थे. तुम हमें संतान वाली पत्नी दो. (१)
O God of Agni! We brought Surya for you with gifts. You give us a wife with children. (1)

अथर्ववेद (कांड 14)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
पुनः॒पत्नी॑म॒ग्निर॑दा॒दायु॑षा स॒ह वर्च॑सा । दी॒र्घायु॑रस्या॒ यः पति॒र्जीवा॑तिश॒रदः॑ श॒तम् ॥ (२)
अग्नि देव ने हमें आयु और तेज के साथसाथ पत्नी प्रदान की है. इस का पति दीर्घजीवी हो और सौ वर्ष की आयु प्राप्त करे. (२)
Agni Dev has given us a wife along with age and speed. Her husband should be long-lived and attain the age of 100 years. (2)

अथर्ववेद (कांड 14)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
सोम॑स्य जा॒याप्र॑थ॒मं ग॑न्ध॒र्वस्तेऽप॑रः॒ पतिः॑ । तृ॒तीयो॑ अ॒ग्निष्टे॒ पति॑स्तु॒रीय॑स्तेमनुष्य॒जाः ॥ (३)
हे वधू! तू पहले सोम की पत्नी हुई. इस के बाद तू गंधर्वो की पत्नी बनी. इस के बाद तेरे तीसरे पति अग्नि देव बने. मैं मनुष्य तेरा चौथा पति हूं. (३)
O bride! You were Som's wife first. After this, you became the wife of Gandharva. After this, your third husband became Agni Dev. I man is your fourth husband. (3)

अथर्ववेद (कांड 14)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
सोमो॑ददद्गन्ध॒र्वाय॑ गन्ध॒र्वो द॑दद॒ग्नये॑ । र॒यिं च॑पु॒त्रांश्चा॑दाद॒ग्निर्मह्य॒मथो॑ इ॒माम् ॥ (४)
हे वधू! सोम ने तुझे गंधर्व को दिया. गंधर्व ने तुझे अग्नि को प्रदान किया तथा अग्नि ने तुझे मेरे लिए दिया है. उन्होंने मुझे धन और पुत्रों से भी संपन्न किया. (४)
O bride! Som gave you to Gandharva. Gandharva gave you agni and agni has given you for me. He also endowed me with wealth and sons. (4)

अथर्ववेद (कांड 14)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
आवा॑मगन्त्सुम॒तिर्वा॑जिनीवसू॒ न्यश्विना हृ॒त्सु कामा॑ अरंसत । अभू॑तं गो॒पामि॑थु॒ना शु॑भस्पती प्रि॒या अ॑र्य॒म्णो दुर्याँ॑ अशीमहि ॥ (५)
हे उषाकालीन ऐश्वर्य वाले अश्विनकुमारो! तुम्हारे हृदय में जो अभीष्ट है, वह तुम्हारी कृपामयी बुद्धि के द्वारा हमें प्राप्त हो. तुम हमारे प्रिय तथा रक्षक बनो. हम सूर्य देव की कृपा से घरों में सुख का भोग करने वाले हैं. (५)
O Ashwinkumaro, the o omensy of usha! May what is desired in your heart be achieved by your gracious intellect. Be our beloved and protector. We are going to enjoy happiness in homes by the grace of Sun God. (5)

अथर्ववेद (कांड 14)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
सा म॑न्दसा॒नामन॑सा शि॒वेन॑ र॒यिं धे॑हि॒ सर्व॑वीरं वच॒स्यम् । सु॒गं ती॒र्थं सु॑प्रपा॒णंशु॑भस्पती स्था॒णुं प॑थि॒ष्ठामप॑ दुर्म॒तिं ह॑तम् ॥ (६)
तुम कल्याणकारी मन से वीरों से युक्त धन का पोषण करो. हे अश्विनी कुमारो! तुम इस तीर्थ को सुफल करते हुए मार्ग में प्राप्त होने वाली दुर्गति आदि को दूर करो. (६)
Nurture the wealth containing heroes with a welfare mind. O Ashwini Kumaro! You should remove the evil etc. received on the way by refining this pilgrimage. (6)

अथर्ववेद (कांड 14)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
या ओष॑धयो॒ यान॒द्यो॒ यानि॒ क्षेत्रा॑णि॒ या वना॑ । तास्त्वा॑ वधु प्र॒जाव॑तीं॒ पत्ये॑रक्षन्तु र॒क्षसः॑ ॥ (७)
हे वधू! ओषधि, नदी, श्वैत और वन तुझे संतान वाली बनाएं तथा दुष्टों से तेरे पति की रक्षा करें. (७)
O bride! Make the medicine, the river, the white and the forest with children and protect your husband from the wicked. (7)

अथर्ववेद (कांड 14)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
एमंपन्था॑मरुक्षाम सु॒गं स्व॑स्ति॒वाह॑नम् । यस्मि॑न्वी॒रो न रिष्य॑त्य॒न्येषां॑वि॒न्दते॒ वसु॑ ॥ (८)
हम उस मार्ग पर चलते हैं, जिस पर वाहन सुखपूर्वक चल सकते हैं. इस मार्ग पर वीरों की हानि नहीं होती तथा अन्य जनों का धन प्राप्त होता है. (८)
We walk on the route on which vehicles can ply happily. On this path, there is no loss of heroes and money of other people is obtained. (8)
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