अथर्ववेद (कांड 15)
स ए॑कव्रा॒त्योऽभ॑व॒त्स धनु॒राद॑त्त॒ तदे॒वेन्द्र॑ध॒नुः ॥ (६)
वह एक व्रात्य अर्थात् समूहों का स्वामी हुआ. उस ने धनुष उठाया और वह इंद्रधनुष बन गया. (६)
He became the master of a vratya i.e. groups. He raised the bow and he became a rainbow. (6)