अथर्ववेद (कांड 15) अथर्ववेद: 15.1.5 | सूक्त: 1 स दे॒वाना॑मी॒शांपर्यै॒त्स ईशा॑नोऽभवत् ॥ (५) वह देवों का स्वामी एवं ईशान हुआ. (५) He became the swami of the gods and ishan. (5)