अथर्ववेद (कांड 15)
इ॒यं वा उ॑पृथि॒वी बृह॒स्पति॒र्द्यौरे॒वेन्द्रः॑ ॥ (६)
आकाश ही इंद्र है और पृथ्वी ही बृहस्पति है. (६)
The sky is Indra and the earth is Jupiter. (6)
कांड 15 → सूक्त 10 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation