अथर्ववेद (कांड 15)
यदे॑न॒माह॑व्रात्योद॒कमित्य॒प ए॒व तेनाव॑ रुन्द्धे ॥ (४)
व्रात्य से यह कहने वाला कि है व्रात्य! यह जल है, अपने लिए जल को ही खोल लेता है. (४)
He is going to say this to the world! It is water, it opens the water for itself. (4)
कांड 15 → सूक्त 11 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation