अथर्ववेद (कांड 15)
यदे॑न॒माह॒व्रात्य॒ क्वावात्सी॒रिति॑ प॒थ ए॒व तेन॑ देव॒याना॒नव॑ रुन्द्धे ॥ (३)
यह कहने पर कि हे व्रात्य! तुम कहां रहोगे? देवयान मार्ग ही खुल जाता है. (३)
On saying that O Swami! Where will you stay? The Devayan route opens. (3)
कांड 15 → सूक्त 11 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation